हनुमान चालीसा में छिपे मैनेजमेंट के सूत्र…
हनुमान चालीसा कई लोगों की दिनचर्या हनुमान चालीसा पढ़ने से शुरू होती है। पर क्या आप जानते हैं कि श्री हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयां हैं, ये उस क्रम में लिखी गई हैं जो...
समस्त ब्रह्मक्षत्रिय समाज
आध्यात्मिकता / देवी देवताए / धर्म दर्शन / रामायण / हिंगलाज
हनुमान चालीसा कई लोगों की दिनचर्या हनुमान चालीसा पढ़ने से शुरू होती है। पर क्या आप जानते हैं कि श्री हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयां हैं, ये उस क्रम में लिखी गई हैं जो...
विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान ( बालकाण्ड ) अष्टावक्र गीता अद्वैत वेदान्त का ग्रन्थ है जो ऋषि अष्टावक्र और राजा जनक के संवाद के रूप में है। भगवद्गीता, उपनिषद और ब्रह्मसूत्र...
धर्म दर्शन / पौराणिक कथाएँ / रामायण / हिंगलाज
श्रवण के पिता का श्राप महाराज दशरथ को जब संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी तब वो बड़े दुःखी रहते थे…पर ऐसे समय में उनको एक ही बात से हौंसला मिलता था जो कभी...
विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान ( बालकाण्ड ) मार्ग में एक सुरम्य सरोवर दृष्टिगत हुआ। सरोवर के तट पर रुक कर विश्वामित्र कहा, “हे राम! ताड़का का वध करके तुमने बहुत...
कामदेव का आश्रम ( बालकाण्ड ) दूसरे दिन ब्राह्म मुहूर्त्त में निद्रा त्याग कर मुनि विश्वामित्र तृण शैयाओं पर विश्राम करते हुये राम और लक्ष्मण के पास जा कर बोले, “हे राम और लक्ष्मण!,...
महर्षि विश्वामित्र का आगमन बालकाण्ड कथा से पूर्वः ऋषि विश्वामित्र जी ने राम और लक्ष्मण को बला और अतिबला नामक असाधारण विद्याओं का प्रशिक्षण देकर समस्त विद्याओं में पारंगत किया। इसका वर्णन रामचरितमानस में...
वाल्मीकि रामायण : महर्षि की अमर कृति (भूमिका ) मानवता का निर्माण और संहार का परिहार वाल्मीकि रामायण की विषय-वस्तु से निकलने वाले दो प्रमुख तत्व हैं। इन दो बुनियादी मानव मूल्यों को अपने...
राम राज्य प्रेम, त्याग, समर्पण, बलिदान से ही आया हम रामायण को पढते और राम राज्य की चाहत रखते है। भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी माँ सीता ने...
देखो यह रामकथा हैं… हम रामायण को पढते और राम राज्य की चाहत रखते है। भरतजी नंदिग्राम में रहते हैं, शत्रुघ्न जी उनके आदेश से राज्य संचालन करते हैं। एक रात की बात हैं,...
दशहरा की परंपरा भगवान श्री राम ने लगातार नौ दिनों तक लंका में रहकर रावण से युद्ध किया. फिर दशमी के दिन उन्होंने रावण की नाभि में तीर मारकर उसका वध कर दिया था....
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